पंचतंत्र की कहानियां – आचार्य विष्णु शर्मा

PANCHATANTRA STORIES IN HINDI

पंचतंत्र की कहानियां (Panchatantra Stories in Hindi) साहित्य की अनमोल धरोहर हैं। यह जीवन के विभिन्न भागों के लिए ज्ञान के प्रकाश का ऐसा भंडार है जो अपनी शिक्षाप्रद कहानियों के माध्यम से नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाता है। पंचतंत्र के लेखक आचार्य विष्णु शर्मा हैं। पंचतंत्र संस्कृत में रचित शिक्षाप्रद कहानियों का संग्रह है। जिसकी कहानियाँ समाज में नैतिक शिक्षा का बीज बोती  हैं। बच्चों में नैतिक शिक्षा प्रदान करने के लिए भी पंचतंत्र की कहानियाँ सर्वोत्तम हैं।

1. पंचतंत्र की कहानी – शेर और चतुर खरगोश

Panchatantra Story: Lion and Clever Rabbit Story in Hindi

 एक जंगल में एक शेर रहता था। व बहुत ही निर्दयी था। वह बिना भूख के भी बहतु सारे जानवरों को मार देता था। जंगल में सभी जानवर शेर से बहुत डरते थे। सभी जानवर इस बात से बहुत चिंतित थे की हम सभी बेवजह ही मारे जायेंगे और इस जंगल में कोई भी जानवर नहीं बचेगा।

सभी जानवरों ने आपस में सलाह की कि यदि शेर ऐसे ही सबको मरता रहा तो शीघ्र ही हम सबका अंत हो जायेगा। इसलिए हम ऐसा करते हैं कि एक एक करके रोज शेर के पास उसके भोजन के रूप में चले जाते हैं। सभी जानवर शेर के पास पहुंचे। जैसे ही सभी जानवर शेर के पास पहुंचे, वह दहाड़कर बोला – बहुत अच्छा किया जो तुम सब एक साथ मेरे सामने आ गए। अब में तुम सबको मार दूँगा।

सभी जानवरों ने शेर से कहा की हम आपसे यह विनती करने आये हैं की आप रोज इतने सारे जानवरों का शिकार न करें। यदि आप ऐसे ही बहुत सारे जनवाओं को एक ही दिन में मार देंगे तो इस जंगल में एक भी जानवर नहीं बचेगा। फिर आपका भोजन कहाँ से आएगा। इसके लिए हमने एक उपाय सोचा है की हम रोज आपके पास एक जानवर भोजन के लिए भेज देंगे। इससे आपको लम्बे समय तक भोजन के लिए परेशानी नहीं होगी।

शेर उनकी बात सुनकर बोला- ठीक है, रोज मेरे पास एक जानवर भोजन के लिए भेज देना। लेकिन यदि एक भी दिन मुझे भोजन नहीं मिला तो मैं तुम सबको मार डालूंगा।

इसके बाद सभी जानवरों ने शेर के पास जाने की बारी लगा दी। जिस दिन जिसकी भी बारी आती थी, वह उस दिन शेर के पास उसके भोजन के रूप में चला जाता था और शेर उसे मारकर खा लेता था।

एक दिन शेर के पास जाने की बारी खरगोश की आयी। वह बहुत देर से शेर के पास पहुंचा। उसे आता देख शेर जोर से दहाड़कर बोला- तुम इतनी देर तक कहाँ थे। आज मैं तुम्हारे साथ साथ सभी जानवरों को मार डालूंगा।

शेर की बात सुनकर खरगोश ने कहा – मैं तो आपके पास समय से ही आ रहा था किन्तु मुझे जंगल में एक और शेर ने रोक लिया और जब मैंने कहा की मैं राजा के पास जा रहा हूँ तो वह कहने लगा की मैं जंगल का राजा हूँ। यह सुनकर शेर बहुत क्रोधित हो गया। वह खरगोश से बोला- कहाँ है वह शेर, जंगल का राजा तो मैं हूँ। मुझे उसके पास ले चलो। पहले मैं उस शेर को ही मारूंगा।

खरगोश शेर को एक कुँए के पास लेकर गया और बोला की यही उसका किला है। वह अपने किले में अंदर छुपा हुआ है। जैसे ही शेर ने कुँए के ऊपर से कुँए के अंदर झाँका  तो पानी में शेर की परछाई दिखाई दी। फिर खरगोश बोला – यही है वह शेर, आपको देखकर अंदर छुपा हुआ है।

शेर बहुत गुस्से में था। शेर ने जोर से कुंए में देखकर दहाड़ लगाई। अपनी परछाई को भी वही हरकत करते हुए देखकर शेर ने सोचा की यह भी मुझ पर दहाड़ रहा है और वह  उस शेर को मारने के लिए कुँए में कूद पड़ा। कुँए में पड़ने के कारण शेर की मृत्यु हो गयी।  खरगोश ने शेर के मरने की यह खबर सभी जानवरों को बताई। सभी जानवर यह सुनकर बहुत खुश हुए। उन्होंने खरगोश की बुद्धिमानी की बहुत प्रशंशा की।

शिक्षा: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की बुद्धि हमेशा ताकत से अधिक ताकतवर है। शरीर से दिखने वाला शक्तिशाली नहीं होता बल्कि बुद्धि का प्रयोग करने वाला शक्तिशाली होता है। अपनी बुद्धि का प्रयोग करके बड़ी से बड़ी मुसीबत का सामना किया जा सकता है।

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2. पंचतंत्र की कहानी – मूर्ख कछुआ

Panchatantra Story: Silly Turtle Story in Hindi

किसी तालाब के पास एक कछुआ रहता था। वहीँ पर दो हंस भी रहते थे। कछुवे और हंसों में मित्रता थी। हंस और कछुआ एक दूसरे के साथ खूब बातें करते थे। जब वह तालाब सूखने ला तो कछुए को अपनी चिंता सताने लगी। उसने हंसो से अपनी चिंता के विषय में बताया।

हंसों ने कछुए की मदद करने का निश्चय किया। हंस लकड़ी की एक डंडी लेकर आये। दोनों हंसों ने उसे दोनों ओर से अपनी चोंच से पकड़ लिए। और कछुए को कहा की इस इसे बीच से मुँह से पकड़ लो। हम तुम्हें इस लकड़ी के माध्यम से उड़कर दूसरे तालाब के किनारे ले जायेंगे।

कछुआ तैयार हो गया। हंसों ने कछुए से कहा की जब हम आकाश में उड़ रहे होंगे तो तुम उस लकड़ी को गलती से भी छोड़ मत देना। यदि तुमने ऐसा किया तो तुम नीचे गिर जाओगे। इस दौरान तुम मुँह से लकड़ी को पकडे रहना और मुँह से कुछ भी मत बोलना। कछुए ने हंसो से कहाँ की मैं कुछ नहीं कहूंगा। आप लोग मुझे ले चलो।

उसके बाद हंस लकड़ी के सहारे कछुए को अपने साथ लेकर उड़े। जब वे उड़ रहे थे तो नीचे लोग उन्हें देखकर शोर मचा रहे थे। कछुए से रहा नहीं गया और उसने हंसों से पुछा की नीचे यह क्या हो रहा है ?

जैसे ही कछुए ने अपना मुँह  खोला, वैसे ही वह नीचे गिर गया। जिससे उसकी मौत हो गयी।

शिक्षा : इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हर बार बोलना आवश्यक नहीं होता। समय के हिसाब से सोच समझकर बोलने वाला व्यक्ति ही जीवन में सफल होता है।

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3. पंचतंत्र की कहानी – बगुला भगत और केकड़ा

Panchatantra Story: Bagula Bhagat and Crab Story in Hindi

 एक वन में बहुत बाद तालाब था। उस तालाब में मछलियां, केकड़े अदि बहुत सरे जीव जंतु निवास करते थे। उस तालाब में एक बगुला भी रहता था। जो अब बूढा हो गया था। वह अब मछलियों का शिकार नहीं कर पाता था। वह एक पैर पर खड़ा होकर आंसू बहाने लग गया।

एक दिन केकड़े ने बगुले से पुछा की मामा क्या हुआ तुम रो क्यों रहे हो? और आप मछलियों का शिकार भी नहीं कर रहे हो। इस तरह तो आप भूखे ही रह जाओगे। बगुला केकड़े को देखकर बोला – मैंने अपने जीवन में बहुत पाप किये हैं। बहुत जीवों की हत्या की है। अब मैं पश्चाताप कर रहा हूँ। अब मैं मछलियों  का शिकार नहीं करूंगा।

केकड़े ने बगुले से पुछा – मामा इस सबके पीछे क्या कारण है। बगुले ने केकड़े से कहा – मैंने एक बड़े ज्योतिषी से सुना है की अब सूखा पड़ने वाला है। अब सब जीवों का क्या होगा। बस यही सोचकर मैं परेशान हूँ।

केकड़ा बगुले की बात सुनकर सभी जीव जंतुओं के पास गया और उनसे कहा की बगुले मामा ने धर्म का मार्ग चुन लिया है। सब जीव जंतु बगुले के पास आये और कहा की हमारी रक्षा के लिए भी कोई उपाय बताइये।

सबके इतना कहने पर बगुला उनकी मदद करने के लिए तैयार हो गया। बगुले ने कहा की थोड़ी दूर पर एक तालाब है जो कभी नहीं सूख सकता। यदि तुम सब वहां चले जाओ तो तुम सबकी जान बच सकती है। लेकिन वहां तक पहुँचने का रास्ता थोड़ा कठिन है। तुम्हारी जान बचाने के लिए मैं तुम्हें एक एक करके अपनी पीठ पर  बिठाकर उस तालाब तक ले जा सकता हूँ।

बगुले की बात सुनकर सब तैयार हो गए। इस तरह बगुला सबको एक एक करके अपनी पीठ पर बिठाकर थोड़ी दूर तक ले जाता और उन्हें वहां मारकर खा जाता। एक दिन जब केकड़ा बगुले की पीठ पर बैठकर जा रहा था तो बगुले ने खुश होकर केकड़े से कहा कि मैं किसी को तालाब में नहीं ले जाता। मैं तो उन्हें मारकर खा जाता हूँ। इसी तरह आज तुम्हें भी मारकर खा लूँगा। केकड़े को बगुले की चालाकी समझ में आ गयी थी। उसने जोर से बगुले की गर्दन दबा दी। जिससे बगुले की मृत्यु हो गयी।

फिर वापस आकर बगुले भगत की चालाकी के विषय में केकड़े ने सभी जीव जंतुओं को बताया। सब जीव-जंतु सोचने लगे की उन्होंने बगुले की बातों पर विश्वास ही क्यों किया। अब सभी ने निश्चय किया कि फिर कभी भी किसी पर इस तरह से विश्वास नहीं करेंगे।

शिक्षा: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कभी भी किसी पर आँख मूंदकर विश्वास नहीं करना चाहिए। बगुले के माध्यम से यह शिक्षा है कि बुराई का अंत हमेशा बुरा ही होता है।

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4. पंचतंत्र की कहानी – शिकारी और कबूतर

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बरगद के एक पेड़ पर बहुत सारे कबूतरों का एक झुण्ड रहता था। एक बार जब सभी कबूतर भोजन की तलाश में आसमान में उड़ रहे थे तो एक जगह पर उन्हें बहुत सारे  दाने पड़े हुए दिखाई दिए। वो कबूतर उन दानों को खाने के लिए जाने लगे। जब वह कबूतर दाना खाने के लिए जमीन पर उतरे तो वह शिकारी के बिछाये हुए जाल में फँस गए।

 सभी कबूतर जाल में फंसने के कारन बहुत परेशान हो गए। कबूतरों के मुखिया ने उन्हें साहस दिया और कहा कि यदि सब कबूतर एक साथ इस जाल को लेकर उड़ें तो वह शिकारी के चंगुल से बच सकते हैं। अपने मुखिया की बात मानकर सब कबूतर एक साथ जाल को लेकर उड़ गए।

अब कबूतर यह सोच रहे थे कि इस जाल से आजादी कैसे मिलेगी। इस पर कबूतरों के मुखिया ने कहा कि थोड़ी दूर पर मेरा पुराना मित्र चूहा रहता है। वह हमारी मदद अवश्य करेगा। सभी कबूतर जाल के साथ चूहे के बिल के पास उतर गए। कबूतरों के मुखिया ने अपने मित्र चूहे को आवाज लगायी और उनकी सहायता करने को कहा। चूहा अपने बिल से बाहर आया तथा थोड़ी ही देर में अपने दांतों से उस जाल को काट दिया। फिर सभी कबूतर आजाद हो गए।

शिक्षा: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि एकता में ही में शक्ति होती है तथा  लालच का परिणाम बुरा ही होता है।

5. पंचतंत्र की कहानी – नीला सियार

Panchatantra Story: Blue Jackal Story in Hindi

 एक जंगल में एक सियार रहता था। एक दिन जब वह भूख से बहुत व्याकुल था तो वह नगर के समीप पहुँच गया। नगर के सभी कुत्ते उस सियार के पीछे पड़ गए। उन कुत्तों से जान बचाकर वह सियार भागने लगा। भागते भागते वह धोबी के एक धोबी के घर में घुस गया। वहां रखे नील घुले हुए एक ड्रम में घुस गया। जब वह उस ड्रम से बहार आया तो वह पूरा नीला हो चूका था।

जब सियार वापस जंगल में पहुंचा तो सभी जीव जंतु उसे देखकर आश्चर्यचकति हो गए। वह सभी इधर उधर भागने लगे। उन सबको देखकर सियार ने उनसे कहा की भगवान ने मुझे तुम्हारा राजा बनाकर भेजा है।

सभी जानवर सियार को देखकर सोचने लगे की ऐसा जानवर पहले कभी नहीं देखा। उन सबने सियार की बात मान ली। इस प्रकार सियार सबके राजा के रूप में जंगल में रहने लगा। सभी जीव-जंतु सियार की सेवा में लगे रहते थे।

एक दिन जब जंगल में सियारों का झुण्ड हूँ… हूँ… की आवाज निकाल रहा था था तो वह भी हूँ… हूँ… की आवाज निकलने लग गया। उसे इस प्रकार करते देखकर सभी जानवर समझ गए की यह तो सियार है। फिर शेर ने झपटकर उसे मार डाला।

शिक्षा: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि झूट अधिक देर तक नहीं चलता  है। सत्य देर से ही सही मगर सामने अवश्य आता है। झूट चाहे कितना भी बोल लो लेखिन अंत में सत्य की ही जीत होती है।

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