Bihari ke Dohe with Meaning in Hindi बिहारी के दोहे हिंदी अर्थ सहित

बिहारी के दोहे Bihari Ke Dohe with meaning in Hindi: रीतिकाल के प्रसिद्द कवि बिहारी लाल का जन्म संवत 1652 में ग्वालियर में हुआ था। उनके बचपन का समय बुंदेलखड में ही व्यतीत हुआ था। उनके जन्म के विषय में स्वयं बिहारी ने यह दोहा लिखा है –

जन्म ग्वालियर जानिए, खंड बुंदेले बाल।

तरुणाई आयी सुघर मथुरा बसि ससुराल।।

उनके पिता का नाम केशव राय था। बचपन में ही उनकी माता का देहांत हो गया था। उनके गोत्र एवं जाति को यह दोहा रेखांकित करता है, जो स्वयं बिहारी ने ही लिखा है-

जन्म लियो द्विजराज कुल सुबास बसे ब्रज आय।

मेरी हरौ कलेस सब केशव केशवराय।।

कुछ समय बाद इनके पिता बुंदेलखंड से ओरछा आ गए।  यहीं इनकी मुलाकात गुरु नरहरिदास से हुई। इन्हीं से बिहारी को शिक्षा -दीक्षा प्राप्त हुई। तत्पश्चात बिहारी के पिता ओरछा से वृन्दावन आ गए। वृन्दावन के निकट मथुरा में ही बिहारी की ससुराल थी। बाद में  इनके गुरु  नरहरिदास भी वृन्दावन में रहने लगे।

Bihari Ke Dohe with meaning in Hindi

वहां एक बार मुग़ल बादशाह शाहजहां और जहांगीर गुरु नरहरिदास जी से मिलने  आये। वहां उनकी भेंट बिहारी से हुई। शाहजहां बिहारी की कविता सुनने के बाद बहुत प्रभावित हुए। बिहारी फिर आगरा में आकर रहने लगे जहाँ शाहजहां के दरबार में उन्हें बहुत सम्मान मिला। वह शाहजहां के बहुत विश्वासपात्र थे।

बिहारी जी ने अपने एक एक दोहे में गागर में सागर भरने  का काम किया है। उनके दोहों के विषय में यह दोहा बहुत प्रसिद्द है-

सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर।

देखन में छोटन लगैं , घाव करें गंभीर।।

बिहारी की बिहारी सतसई एक अद्भुत रचना है। यह 719 अनमोल दोहों का अनमोल खजाना है। इसका एक-एक दोहा अनमोल मोती के समान है। इस पोस्ट में हम बिहारी जी के कुछ प्रसिद्द दोहों  को अर्थ सहित समझने का प्रयास करेंगे।

21+ Bihari ke Dohe with Meaning in Hindi


 दोहा संख्या: 1

मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोई।

जा तन की झांई परै स्याम हरित-दुति होइ।।

भावार्थ: इस दोहे में बिहारी लाल अपने आराध्य राधा-कृष्ण की स्तुति करते हैं। वे देवी राधा से अपने सभी कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। वे कहते हैं कि हे राधिका जिस प्रकार  तुम्हारी एक झलक मात्र से श्रीकृष्ण प्रसन्न हो जाते हैं। उसी प्रकार अपनी एक झलक दिखाकर मेरे सांसारिक जीवन को भी हरा-भरा कर दो अर्थात मेरे सभी कष्टों को को दूर कर दो।


Bihari Satsai in Hindi


दोहा संख्या: 2

बतरस-लालच लाल की, मुरली धरी लुकाई।

सौंह करैं भौंहनु हंसै, दैन कहै नटि जाइ।।

भावार्थ:  श्रीकृष्ण से बात करने के लालच में राधिका ने उनकी बांसुरी कहीं छुपा दी है। जब श्रीकृष्ण मैया या बाबा की कसम लेते हैं तो राधिका मंद-मंद मुस्कुरा जाती है। ताकि श्रीकृष्ण उन पर संदेह करने लगें और अपनी बांसुरी को ढूंढने कहीं और न जाएं। लेकिन जब श्रीकृष्ण उनसे बांसुरी मांगते हैं तो वे कहती हैं कि मैंने आपकी बांसुरी नहीं ली है।यही श्री राधा-कृष्ण की परम लीला है।

बिहारी लाल जी ने इस दोहे में सच्चे प्रेम को दर्शाया है जिसमे प्रेमिका हर विधि से अपने प्रियतम के साथ रहने का सुख चाहती है।


दोहा संख्या: 3

कोकहि सकै बड़ेनु सौं लखें बड़ीयौ भूल।

दीने दई गुलाब की इन डारनु वे फूल ।।

भावार्थ: इस दोहे में बिहारी लाल जी कहते हैं कि बड़े लोगों की भूल को देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता कि यह उनकी भूल है। क्योंकि उनकी भूल के पीछे  भी लोगों का हित ही छुपा होता है। ईश्वर ने गुलाब के कांटेदार वृक्षों में कितने ख़ूबसूरत, नरम और खुशबूदार फूल दिए हैं। लेकिन कोई कैसे ईश्वर की गलतियां निकाल सकता है। वह तो परमपिता परमेश्वर है।


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दोहा संख्या: 4

कनक कनक तैं सौगुनी मादकता अधिकाइ।

उहि खायें बौराई इहिं पाएं ही बौराइ।।

भावार्थ:  बिहारी लाल जी कहते हैं कि सोने का उन्माद धतूरे से सौ गुना ज्यादा होता है। धतूरे को तो खाकर लोग बौराते हैं लेकिन सोने को तो पाने से ही बौरा जाते हैं। भाव यह है कि धन-संपत्ति का नशा किसी भी अन्य नशीली वस्तु से अधिक होता है। क्योंकि नशीली वस्तु के खाने से ही सिर्फ नशा होता है। जबकि धन-संपत्ति का नशा तो उसे पाते ही चढ़ जाता है।


दोहा संख्या: 5

कहत, नटत, रीझत, खीझत, मिलत, खिलत, लाजियात।

भरे भौन में करत हैं, नैननु हीं सब बात।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि दो सखियाँ नायक और नायिका के विषय में आपस में बात करते हुए कह रही हैं कि ये दोनों भरे भवन में आँखों ही आँखों से एक दूसरे से सारी बातें कर लेते हैं। कभी ये बात करते हुए दिखाई देते हैं, कभी असहमति प्रकट करते हैं, कभी रीझते हैं, कभी खीझने लगते हैं, कभी मिलते हैं, कभी प्रसन्न होते हैं और कभी शरमाने लगते हैं। इस प्रकार भरे भवन में सबसे सामने ही वे इशारों ही इशारों में सभी इच्छाएं पूरी करते हैं।


दोहा संख्या: 6

नहिं परागु नहिं मधु नहिं विकासु इहिं काल।

अली, कली ही सौं बंध्यौ, आगे कौन हवाल।।

भावार्थ: बिहारी  लाल जी इस दोहे में नायिका पर आसक्त नायक को भौंरे के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं। वे कहते हैं कि अभी इस कलि में न तो पराग आया है और न ही इसमें मीठा शहद ही है और न ही इसमें विकास हुआ है। हे भौंरे अपने सारे काम छोड़कर तुम उसे कलि के मोह में ही बंधे हुए हो। आगे जब यह कलि फूल बन जाएगी और इसमें पराग, शहद और विकास होगा तो तुम्हारा क्या हाल होगा ?


दोहा संख्या: 7

ओछे बड़े न ह्वै सकें, लगौ सतर ह्वै गेन।

दीरघ होहिं न नैंक हूं फारि निहारें नैन।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि अवगुणी व्यक्ति चाहे कितने भी बड़े क्यों न हो जाएं, वे कभी भी सज्जन व्यक्तियों की बराबरी नहीं कर सकते। जैसे आँखों को चाहे कितना भी फैला फैला कर देख लो लेकिन वे बड़ी नहीं हो सकती।

Bihari ke Dohe in Hindi
Bihari ke Dohe

दोहा संख्या: 8

बड़े न हूजै गुननु बिनु बिरद-बड़ाई न पाई।

कहत धतूरे सौं कनकु, गहनौ गढ़्यौ न जाइ।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति चाहे कितनी भी प्रसिद्धि प्राप्त कर लेकिन बिना गुणों के महान नहीं बन सकता। जिस प्रकार धतूरे को कनक भी कहा जाता है लेकिन उसका आभूषण नहीं बन सकता।


दोहा संख्या: 9

तजि तीरथ, हरी-राधिका-तन-दुति करि अनुरागु।

जिहिं ब्रज केलि-निकुंज मग पग-पग होते प्रयागु।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि भक्त ब्रजभूमि की महिमा का वर्णन करते हुए कह रहे हैं कि हे मन तू बाकी तीर्थ स्थानों को त्याग दे और भगवान् श्रीकृष्ण और राधा का ध्यान करके उनकी आराधना कर। भगवान् श्रीकृष्ण और राधा ने ब्रज में तरह तरह की लीलाएं की हैं। जिसके कारण ब्रज के निकुंज का पग पग गंगा यमुना का संगम तीर्थराज प्रयाग ही है। इसलिए तू किसी अन्य तीर्थ के मोह में मत फँस। भगवान् श्रीकृष्ण और राधा की आराधना में ही सभी तीर्थ हैं।


दोहा संख्या: 10

छला छबीले लाल कौ नवल नेह लहि नारि।

चुंबति, चाहति, लाइ उर पहिरति, धरति उतारि।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि एक सखी अपनी दूसरी सखी से कह रही है कि हे सखी नायिका नए-नए प्यार में  अपने लाल छल्ले को पाकर बहुत खुश हो रही है। वह उस छल्ले को कभी चूम लेती है, कभी उसे निहारती है,  कभी उसे अपने ह्रदय से लगा लेती है, कभी उसे अपने गले में पहन पहन लेती है और कभी उसे उतार देती है।


दोहा संख्या: 11

जपमाला, छापैं, तिलक सरै न एकौ कामु।

मन कांचै नाचै वृथा, सांचे रांचे रामु।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि केवल जप करने से, माला लेने से या तिलक लगाने से  कोई सच्चा सन्यासी या महात्मा नहीं बन जाता। यह सब बाह्य आडम्बर है। इन सबसे ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती। वास्तविक भक्ति के बिना मन की चंचलता नहीं मिट सकती। क्योंकि उसमे प्रेम नहीं होता है। उस व्यक्ति की ही भक्ति सफल होती है जिसके ह्रदय में राम विराजमान हैं और वह राम के नाम में ही मग्न रहता है।


दोहा संख्या: 12

झटकि चढ़ति उतरति अटा, नैंक न थाकति देह।

भई रहति नट कौ बटा अटकी नागर-नेह।।

भावार्थ: बिहारी  लाल जी कहते हैं कि एक सखी दूसरी सखी से नायिका को देखकर कह रही है कि नायिका नायक को देखने के लिए बार बार अपनी बालकनी में जा रही है। और उसके चेहरे पर बिलकुल भी थकान नजर नहीं आ रही है। वह नायिका नट की चकई के सामान नायक के वश में होकर यहाँ-वहां घूम रही है।


दोहा संख्या: 13

मरनु भलो बरु बिरह तैं, यह निहचय करि जोइ।

मरन मिटे दुखु एक कौ, बिरह दुहूं दुखु होई।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि नायक को उसके मित्र समझा रहे हैं कि इस बात को तुम समझ लो कि विरह का दुःख भोगने से अच्छा उसके लिए मरना ही था। क्योंकि मरने से दुःख तो समाप्त हो जाता है लेकिन विरह से दोनों को  दुःख ही भोगना पड़ता है। 

Bihari ke dohe with meaning


दोहा संख्या: 14

मैं समुझयौ निर्धार, यह जगु कांचो कांच सौ।

एकै रूपु अपार प्रतिबिंबित लखियतु जहां।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि मेरी समझ में तो यह आया है कि यह असत्य संसार कांच की तरह है जिसमे एक रूप अनेक रूपों से प्रतिबिंबित होता है।


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दोहा संख्या: 15

संगति सुमति न पावहीं परे कुमति कैं धंध।

राखौ मेलि कपूर मैं, हींग न होइ सुगंध।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि बुरे व्यक्ति की संगती में पड़े हुए लोग अच्छी संगती से भी सज्जन नहीं बनते हैं। हींग को चाहे कितना भी कपूर मिलाकर रखा जाए लेकिन उसकी महक अच्छी नहीं होती है।

Bihari ke Dohe with Meaning in Hindi
Bihari ke Dohe

दोहा संख्या: 16

गिरी तें ऊँचे रसिक-मन बूढ़े जहाँ हजारु।

वहै सदा पसु-नरनु कौ प्रेम-पयोधि पगारु।।

भावार्थ:  बिहारी लाल जी कहते हैं कि पहाड़ से भी ऊँचे रसिकों के जहाँ हजारों मन डूब गए वही प्रेम का समुद्र नर-पशुओं के लिए हमेशा एक खाई मात्र ही है।


दोहा संख्या: 17

सीस-मुकुट, कटि-काछनी, कर मुरली, उर-माल।

इहिं बानक मो मन सदा बसौ, बिहारी लाल।।

भावार्थ:  बिहारी लाल जी कहते हैं कि हे कान्हा तुम मेरे ह्रदय में इस तरह बसों, जिसमे सिर पर मोर मुकुट हो, कमर में काछनी हो, हाथ में मुरली हो और गले में माला हो।


दोहा संख्या: 18

कोरि जतन कोऊ करौ, परै न प्रकृतिहिं बीचु।

नल-बल जलु ऊंचै चढैं, अंत नीच कौ नीचु।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि कोई चाहे करोड़ों उपाय कर ले, लेकिन प्रकृति पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। नल की ताकत से फुव्वारे का पानी ऊंचाई तक चढ़ता तो है लेकिन फिर भी वह नीच का नीच ही रहता है अर्थात नीचे ही गिरता है।


दोहा संख्या: 19

पतवारी माला पकरि, और न कछू उपाउ।

तरि संसार-पयोधि कौं, हरि-नावें करि नाउ।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि माला रूपी पतवार को पकड़कर और ईश्वर के नाम की नाव बनाकर इस संसार रूपी समुद्र से पार पाने के अलावा दूसरा कोई भी उपाय नहीं है।


दोहा संख्या: 20

प्रलय-करन बरषन लगे जुरी जलधर इकसाथ।

सुरपति-गरबु हरयौ हरषि गिरिधर गिरी धरी हाथ।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि देवराज इंद्र की आज्ञा से प्रलयकारी बादल ब्रज को बहाने के लिए एक साथ इकट्ठे होकर बरसने  लगे। लेकिन भगवान् श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को हाथ पर धारण कर ब्रजवासियों को शरण दी और देवराज इंद्र का घमंड चूर-चूर कर दिया।

Bihari Ke Dohe with Meaning in Hindi


दोहा संख्या: 21

मोर-मुकुट की चंद्रिकनु यौं राजत नंदनंद।

मनु ससीसेखर की अकस किय सेखर सत चंद।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि भगवान् श्रीकृष्ण मोरमुकुट की चंद्रिकाओं से ऐसे सुशोभित हो रहे हैं मानो उन्होंने अपने माथे पर सैकड़ों चंद्रमा धारण कर लिए हों।


दोहा संख्या: 22

सोहत ओढ़ैं पीट पटु स्याम, सलौनें गात।

मनौ नीलमनि शैल पर आतपु परयौ प्रभात ।।

भावार्थ: बिहारी लाल जी कहते हैं कि नायक की सुंदरता का वर्णन करते हुए सखी नायिका से कहती है कि नायक का शरीर बहुत ही सुन्दर एवं चमकदार है। ऐसे सुन्दर शरीर पर पीताम्बर ओढ़ने से ऐसा प्रतीत होता है मानो नीलमणि पर्वत सुबह के समय सूर्य की किरणें पड़ रही हों। 


दोस्तों उम्मीद है कि आपको यह पोस्ट “Bihari ke Dohe with Meaning in Hindi” अच्छी लगी होगी। आप अपनी अमूल्य राय हमें नीचे कमेंट बॉक्स में  कमेंट करके भी भेज सकते हैं।

यद्यपि इन दोहों “Bihari ke Dohe”के भावार्थों में पूर्ण सावधानी बरती गयी है लेकिन इनमे त्रुटियां होने की भी सम्भावना है।

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