HOW TO KEEP A POSITIVE ATTITUDE AT WORKPLACE IN HINDI
कार्यस्थल पर सकारात्मक दृष्टिकोण कैसे रखें ?

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कार्यस्थल पर सकारात्मक दृष्टिकोण कैसे रखें (How to keep a positive attitude at workplace in Hindi?): जब भी हम किसी दफ्तर को ज्वाइन  करते हैं तो हमारे मन में उस जॉब को लेकर बड़ा ही उत्साह एवं उमंग होती है। हमारी कोशिश यही होती है कि हम खूब मेहनत करेंगे जिससे कि कंपनी में हमारी तरक्की होगी।

लेकिन बढ़ते समय के साथ व्यक्ति के विचारों में परिवर्तन आ जाता है और वह सिर्फ यह सोचकर कार्य करने लगता है की सुबह समय पर जाना है और शाम को समय पर घर जाना है। कार्य को भी वह बोझ समझने लगता है। उसके दिमाग में यह विचार आने लगता है कि बस आराम से जो कार्य दिया जाये उसे पूरा कर दो बस। अधिक कार्य क्यों करें ? यह सोच व्यक्ति के साथ साथ उस कंपनी के लिए भी हानिकारक है।

HOW TO STAY POSITIVE IN WORKPLACE IN HINDI

हर कंपनी का भविष्य अपने कर्मचारियों  पर निर्भर रहता है। यदि कंपनी के कर्मचारी ही कामचोरी करने लगेंगे तो उस कंपनी कभी भी तरक्की नहीं कर पायेगी। कर्मचारियों की यह सोच उस कंपनी को दीमक की तरह समाप्त कर देगी। यदि कंपनी ही नहीं रहेगी तो लोगों के रोजगार का क्या होगा। लोगों की आवश्यकता की वस्तुओं की पूर्ती कहाँ से होगी। कंपनी उत्पाद बनाती है तो बहुत से लोगों को रोजगार प्रदान करती है एवं  न जाने कितने परिवारों की रोजी रोटी उससे चलती है। इसलिए हर व्यक्ति का यह कर्त्तव्य है की कंपनी को सिर्फ 9 से 5 की ड्यूटी न समझें। बल्कि यह सोचें की आप उस कंपनी के लिए क्या बेहतर कर सकते हैं। जिससे उस कंपनी की तरक्की हो। कंपनी की तरक्की होगी तो आपकी तरक्की स्वाभाविक ही होगी।

अब प्रश्न यह उठता है की ऐसा क्यों हुआ जो व्यक्ति बड़ी उम्मीद और उत्साह से उस कंपनी में कार्य करने के लिए आया था, उसका उत्साह कहाँ चला गया ? ऐसा इसलिए है कि वह व्यक्ति नकारात्मक सोच के साथ कंपनी में कार्य करता है। और नकारात्मक सोच उसके नकारात्मक नजरिये का परिणाम है। यह आवश्यक है कि व्यक्ति हमेशा सकारात्मक सोच के साथ कार्य करे।

Stay Positive at Office

आइये जानते  हैं की अपने कार्यस्थल पर सकारात्मक कैसे रह सकते हैं ? एवं अपने हर कार्य को पूरे उत्साह और प्रसन्नतापूर्वक कैसे कर सकते हैं?

HOW TO DEVELOP A POSITIVE ATTITUDE AT WORKPLACE IN HINDI

सकारात्मक लोगों के साथ में रहे (Stay with positive people):

कंपनी में दो तरह के लोग होते हैं। जहाँ एक तरफ बहुत मेहनती लोग होते हैं। दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो मेहनत करने से कतराते हैं। वे हमेशा नकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करते हैं। वो दूसरों को भी अपनी ही तरह बनाने का प्रयास करते हैं। ऐसे लोगों से दूर ही रहना अच्छा है। हमेशा ऐसे लोगों के साथ रहो जो सकारात्मक नजरिया रखते हों। जो मेहनत करते हों तथा दूसरों को भी सकारात्मक बनाते हैं। इससे आपके अंदर भी सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

 चेहरे पर हमेशा मुस्कराहट रखें: (Always smile on the face):

अपने चेहरे पर हमेशा मुस्कराहट रखें। इससे आपका व्यक्तित्व निखरता है। आपके चेहरे पर मुस्कराहट से आपका आत्मविश्वास झलकता है। जब आप किसी से मुस्कराहट के साथ मिलते हैं तो आपकी सकारात्मक छवि बनती है। इससे आपको कार्यस्थल पर हर कोई पसंद करता है।

अपने मन को सकारात्मक रखें: (Keep your mind positive):

हमेशा सकारात्मक बने रहे। आपको जो भी कार्य दिया जाये उसे हमेशा सकारात्मकता से लें। किसी भी  कार्य को बोझ न समझें। यह कैसे होगा,  कब होगा, कैसे करू, यह कार्य मुझे ही  क्यों दिया किसी और को क्यों नहीं आदि के विषय में न सोचें। इसके स्थान पर सकारात्मक मन के साथ उस कार्य में मेहनत करें।

दूसरे लोगों के साथ अच्छा बर्ताव करें: (Be nice to other people):

अपने सहकर्मियों से अच्छा व्यवहार करें। किसी के भी विषय में नकारात्मक न सोचें। अपने सीनियर स्टाफ को इज्जत दें। अपने जूनियर स्टाफ से अच्छे से पेश आएं। यदि आपके जूनियर के किसी कार्य में थोड़ा लेट हो जाये या कोई कमी भी रह जाये तो उनको उस कार्य को ठीक से समझाएं। उन पर एकदम भड़क न उठें। यदि आप उनको प्यार से उस कार्य की अहमियत समझायेंगे तो उनकी नजर में आपकी इज्जत और भी अधिक बढ़ जाएगी।

अपनी भाषा पर ध्यान दें (Watch your language):

शब्द  दिखने में चाहे बहुत छोटे  हों पर वह बहुत घाव बहुत गहरे करते हैं। इसलिए बोलने से पहले हमेशा सोच लें कि आप क्या बोलने जा रहे हैं। बोलने से पहले यह विचार करे कि जिन शब्दों का प्रयोग आप करने जा रहे हैं। कहीं वह शब्द किसी को तकलीफ पहुँचाने वाले तो नहीं हैं। आपकी भाषा आपके व्यक्तित्व का परिचय दूसरों से करवाती है।

राजनीति करने से बचें: (Avoid doing politics):

एक दूसरे के खिलाफ राजनीती करने या करवाने से बचें। अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ें न की दूसरे की कमियों को गिनाकर। दूसरों का कार्य बिगड़कर आप कामयाब नहीं हो सकते। अपने कार्य में अपना 100  प्रतिशत दें। खूब मन लगाकर कार्य करें। आप अवश्य कामयाब होंगे। यह कामयाबी आपको सबकी नजरों में अच्छा साबित करती है। इससे आपका भी मनोबल बढ़ेगा।

दूसरों की बुराई न करें: (Do not harm others):

कुछ लोग दूसरों की बुराई करने में ही अपना सारा समय नष्ट करते हैं। वे दूसरों की कमियों के विषय में तथा उनका मजाक ही बनाते रहते हैं। वे दूसरों से भी यही उम्मीद करते हैं कि वे भी उनकी बुराई की महफ़िल में शामिल हो जाएं। इस प्रकार की बातों में शामिल न हों। दफ्तर में किसी की बुराई  न करें। जब आप दूसरे व्यक्तियों की बुराई कर रहे होते हो तो आप अपना स्तर भी गिरा रहे होते हो। इससे आपके व्यक्तित्व पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आपकी छवि कभी भी एक अच्छे कर्मचारी की नहीं बनेगी। इसलिए बुराई  करने से बचें।

POSITIVE ATTITUDE DEVELOPMENT TIPS IN HINDI

अपने कार्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें (Understand your responsibility towards your work):

जो कार्य आपको दिया गया है वह कार्य पूरी सत्यनिष्ठा के साथ करें।  कंपनी के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें। कंपनी की तरक्की के साथ ही आपका रोजगार, आपकी तरक्की जुडी हुई है। इसलिए हर कार्य को जिम्मेदारी के साथ पूरा करें।

अपने कार्य को समय पर पूरा करें (Complete your work on time):

जो भी कार्य आपको दिया जाये उसे समय पर पूरा करें। इससे आपके ऊपर कार्य की अधिकता का बोझ नहीं पड़ेगा। जिससे आप हमेशा सकारात्मक सोच के साथ कार्य करेंगे।

नए लोगों का मार्गदर्शन करें (Guide new people):

हर व्यक्ति जब किसी कंपनी में अपने कार्य की शुरुआत करता है तो उसके लिए वह स्थान तथा वह कार्य नया होता है। ऐसे में उनको मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। ऐसे में आप उनका मार्गदर्शन करें। ऐसे में आपके व्यक्तित्व की विशालता का पता चलता है।

शिकायत करने से बचें (Avoid complaining):

कुछ लोगों की आदत होती है कि हर समय शिकायत करना। उनको कोई भी कार्य दिया जाता है तो वो बहाना बनाना नहीं भूलते। उनकी शिकायत का पिटारा भी तैयार रहता है। ऐसे लोगों को कोई भी पसंद नहीं करता। हर समय शिकायत करने से आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक असर पड़ता है। इससे आपको हर समय शिकायत करने की आदत पड़ जाएगी। यह आपके भविष्य के लिए भी नकारात्मक सिद्ध होगा।  इसलिए शिकायत करने से बचें। शिकायत करने के स्थान पर पूरी मेहनत के साथ कार्य करें।

हमेशा सीखने के लिए तैयार रहें  (Always be ready to learn):

कोई भी व्यक्ति कभी भी पूर्णज्ञानी नहीं होता। हमें सब कुछ आता है, यह सोच न रखें। हमेशा कुछ नया सीखने की ललक अपने अंदर रखें। याद रखें कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। जब भी किसी से कुछ नया सीखने को मिले तो अवश्य सीखें। इससे आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।

दोस्तों, उम्मीद है की इस लेख “कार्यस्थल पर सकारात्मक दृष्टिकोण कैसे रखें (How to keep a positive attitude at workplace?) से आपको अपने दफ्तर में सकारात्मक बने रहने में मदद अवश्य मिलेगी। यदि आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो कृपया इसे शेयर करके अन्य व्यक्तियों तक भी पहुंचाएं। धन्यवाद

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