उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों से होता पलायन Migration in Uttarakhand (India)

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उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों से होता पलायन (Migration in Uttarakhand): उत्तराखंड, भारत के उत्तर भाग में स्थित एक पर्वतीय राज्य है। जो अपनी सुंदरता के लिए विश्वविख्यात है। यहाँ उपस्थित प्राकृतिक सुंदरता सबका मन मोह लेती है। देव भूमि के नाम से विख्यात यह प्रदेश धार्मिकता में भी अपनी अलग पहचान रखता है। यहाँ स्थित अनेक धार्मिक स्थलों के दर्शनों के लिए प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। पवित्र गंगा नदी के दर्शन एवं स्नान करने के लिए श्रद्धालु भारी संख्या में पहुँचते हैं।

हिमालय की खूबसूरत पहाड़ियों में स्थित यह प्रदेश प्रकृति की अनुपम धरोहर है। लेकिन वर्तमान समय में इसका पहाड़ी क्षेत्र बहुत बड़ी समस्या से झूझ रहा है। यह समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। हम जिस समस्या की बात कर रहे हैं वह है – पलायन की समस्या। जिसके कारण आज पहाड खाली होते जा रहे हैं। कभी जिन गावों में उत्सव का माहौल होता था आज सन्नाटा पसरा हुआ है। सभी लोग शहरों की ओर चले गए और गाँव में रह गया सिर्फ सन्नाटा।  जो एक बार पहाड़ छोड़कर चला जाता है वो फिर कभी मुड़कर पहाड़ की तरफ नहीं देखता है।     

पूर्वजों के बनाये हुए वो घर जहाँ कभी रौनक हुआ करती थी, आज खँडहर हुए जा रहे हैं। मानों कंकाल की भांति हमारे मन को कचोट रहे हों। हमसे पूछ रहे हों कि हमारा क्या कसूर था, क्यों हमको बंजर छोड़ दिया। हमारे एकएक कोने में बीता हुआ तुम्हारा वो बचपन तुम कैसे भूल गए। अपने पूर्वजों की निशानियों को कैसे भूल गए।

उत्तराखंड से होता पलायन

Migration from Uttarakhand

वहां खड़े पेड़पौधे मानो इस आस में खड़े हों कि कभी कभी कोई अवश्य आएगा, जो हमारी सुध लेगा। वो मानों हमसे सवाल कर रहे हों, कि हमारी जिस हवा से तुम्हारी सांस चलती थी, तुम वो कैसे भूल गए। जिन पेड़ पौधों से तुम्हारे पशु पलते थे और तुम उनका दूध पीते थे। तुम उस दूध के कर्ज को कैसे भूल गए।

जिन खेतों में कभी फसल लहराती थी, वो खेत आज बंजर पड़े हैं। वो खेत मानों सवाल करते हों कि हम पर उगाई हुई वो फसल जिसे खाकर तुम इतने बड़े हुए। उसका कर्ज कैसे भूल गए। क्या कभी तुमको याद नहीं आती कि कैसे होंगे वो खेत खलिहान जिनको हमारे पूर्वजों ने अपने खून-पसीने से सींचा।

पलायन की इस समस्या के आगे कभी न झुकने वाला पहाड़ आज घुटने तक रहा है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब पहाड़ों में जीवन सिर्फ किताबों तक ही सीमित रह जायेगा। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो हमारा पहाड़ हमसे बहुत बहुत दूर हो जायेगा और इसके जिम्मेदार हम खुद होंगे।

उत्तराखंड से पलायन के लिए जिम्मेदार कारण

(Reasons responsible for migration in Uttarakhand):

अपने गाँव से पलायन कोई शौक से या ख़ुशी से नहीं करता है। बेहतर जीवन की तलाश में आज उत्तराखंड से युवा पहाड़ों से शहरी क्षेत्रों की तरफ बढ़ रहा है। आइये जानते हैं इसके लिए जिम्मेदार कुछ प्रमुख कारणों के विषय में: 

बच्चों की बेहतर शिक्षा (Better education of children):

हर व्यक्ति यह चाहता है कि वह अपने बच्चों अच्छी शिक्षा दे सके। इसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों में अच्छे स्कूलों का आज भी अभाव है। बच्चों को कई किलोमीटर तक दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलने के बाद स्कूल पहुंचना पड़ता है। जिससे उनकी पढाई भी प्रभावित होती है। इसलिए अपने बच्चों के बेहतर भविस्य के लिए लोग अपना गाँव छोड़ने को विवश होते हैं।

रोजगार की तलाश (Seeking employment):  

मनुष्य के लिए रोजगार का होना अत्यंत आवश्यक है। जिससे वह अपनी दिनचर्या चला सके, परिवार का भरण पोषण कर सके। पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार का  अभाव है। वहां न तो कोई फैक्ट्री ही है, न बड़े अस्पताल हैं, न बड़े कॉलेज हैं तथा न ही कोई अन्य रोजगार है। इसलिए लोग रोजी रोटी की तलाश में बड़े बड़े शहरों में जाने को विवश हैं।

बेहतर भविष्य की तलाश (Seeking a better future):

अपनी पढाई पूरी करने के बाद युवाओं के सामने अपने भविष्य का सपना होता है। कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, कोई वकील, कोई अध्यापक, कोई बिज़नेस मैन तथा अन्य जो भी उनके सपने हों। इसके लिए उन्हें अपने गावं में अवसर नहीं मिल पाते हैं। इसलिए वह अपने बेहतर भविष्य के लिए शहरों की तरफ चले जा रहे हैं।

चिकित्सा सुविधाओं का अभाव (Lack of medical facilities):

दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी अच्छे अस्पतालों का अभाव है। जिसके कारण यह देखने को मिलता है कि यदि आज भी किसी गाँव में रात को किसी व्यक्ति को कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो उसे कई किलोमीटर तक चलना पड़ता है किसी अस्पताल में पहुँचने के लिए। इसके कारण लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।

Migration in Uttarakhand 

सुख-सुविधाओं का अभाव (Lack of amenities):

पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण वहां पर सुख सुविधाओं का अभाव होता है। अधिकतर युवा सुख सुविधाओं के लिए शहरों में रहना पसंद करते हैं। गाँव की जिंदगी में उन्हें वह सुख सुविधा नहीं मिल सकती जिसके कारन वह अपना गाँव छोड़कर शहर चले जाते हैं।

यातायात के साधनों का अभाव (Lack of means of transport):

पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी यातायात के सीमित साधन हैं। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण आज भी मुख सड़क से अपने घर तक जाने के लिए उन्हें पैदल मार्ग से ही जाना पड़ता है। यातायात के सीमित साधन होने के कारन भी वहां के क्षेत्रीय निवासियों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

कृषि का ख़राब होना (Declining agriculture):

कृषि उपज में भी गांव में धीरे धीरे गिरावट आ रही है। उसके लिए भी अनेक कारण उत्तरदायी हैं। कभी कभी तो किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिल पाती है। जिससे निराश होकर लोग खेती छोड़कर कुछ और रोजगार ढूंढ रहे हैं।

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उत्तराखंड से पलायन को रोकने के उपाय

Measures to prevent migration from Uttarakhand

स्कूल / कॉलेज खोलना (School / College Opening):

पर्वतीय क्षेत्रों में अच्छे स्कूल तथा कॉलेज खोलने की आवश्यकता है। जिससे वहां के लोग अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए बाहर भेजें और नजदीकी स्कूल में ही पढ़ाएं। अधिकांश लोग बच्चों की शिक्षा के लिए ही अपना गाँव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। ऐसे में यदि वहीँ पर अच्छे स्कूल होंगे तो उन्हें अपना गाँव छोड़कर दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा।

अच्छे अस्पताल बनाना (Building Good Hospitals):

पहाड़ी क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा को दुरुस्त करने की आवश्यकता है। हालांकि सरकार की तरफ से भी इस दिशा में लगातार प्रयास होते रहे हैं और हो रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी अनेक गाँव ऐसे हैं जहाँ अस्पताल ही नहीं हैं। उनको इलाज के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है जिसमे बहुत समय नष्ट हो जाता है। किसी भी आपात स्थिति में उनको भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छे अस्पताल बनाने की आवश्यकता है जिससे लोगों को वहां पर ही अच्छा इलाज मिल सके। 

Migration in Uttarakhand 

रोजगार की व्यव्यस्था करना (Arranging employment):

अपनी आजीविका के लिए हर व्यक्ति को रोजगार की आवश्यकता होती है। पहाड़ी क्षेत्रों में आजीविका कमाने के लिए लोगों को बहुत संघर्ष करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उनके पास रोजगार के लिए दूसरे शहरों में जाने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं बचता है। इसलिए वहां पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना पलायन रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि वहां के लोगों को वहां पर रोजगार मिल जाये तो वो रोजगार के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करेंगे।

कृषि पर ध्यान देना (Focus on Agriculture):

गिरती पैदावार तथा फसलों का नुक्सान भी किसानों को दूसरे रोजगार के साधन ढूंढने के लिए विवश कर रहे हैं। कृषि पैदावार को बढ़ाना, उन्नत बीज प्रदान करना, सिंचाई के साधनों का विकास करना, कीट पतंगों से फसल के रक्षा के लिए दवाइयों का छिड़काव करना तथा किसानों को उनकी मेहनत का फल मिले इसके लिए व्यवस्था करना अनिवार्य है।

यातायात के साधनों का विकास (Development of modes of transport):

आज भी पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसे ग्रामीण क्षेत्र हैं जहाँ सड़क मार्ग से नहीं पहुंचा जा सकता है। वहां जाने के लिए मुख्य सड़क से काफी पैदल चलना पड़ता है। हालाँकि सरकारों द्वारा इस दिशा में बहुत तेजी से कार्य किये जा रहे हैं। यदि यातायात के साधन विकसित होंगे तो ग्रामीण क्षेत्र भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। इससे पलायन को रोकने में सहायता मिलेगी।

पर्यटन को बढ़ावा (Promotion of Tourism):

उत्तराखंड प्रकृति की गोद में स्थित एक खूबसूरत प्रदेश है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यहाँ प्राकृतिक सौन्दर्य की अनुपम छटा के अद्भुत दर्शन होते हैं। हिमालय की पहाड़ियों के खूबसूरत दर्शन देखते ही बनते हैं। यहाँ पर प्रसिद्द देवस्थान तथा माँ गंगा  के पावन दर्शन पर्यटकों को अपनी ओर खूब आकर्षित करते हैं। उत्तराखंड में काफी स्थान ऐसे हैं जो बेहद खूबसूरत हैं पर वहां पर अभी पर्यटक कम संख्या में पहुँचते हैं। उत्तराखंड में पर्यटन को अधिक बढ़ावा देने की आवश्यकता है। पर्यटन के बढ़ने से वहां पर क्षेत्रीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। उससे उन्हें रोजगार के लिए शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। 

लघु उद्योग तथा अन्य उद्योग धंधों का विकास (Development of small scale industries and other industries):

आज भी उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लघु उद्योगों के लिए सफलता के अवसर मौजूद हैं। बस आवश्यकता है उसे बढ़ावा देने की। लघु उद्योगों के विकास के लिए सरकार को क्षेत्रीय स्तर पर प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। इसके साथ साथ ही अन्य उद्योग धंधों के विकास के लिए भी देश के बड़े उद्योगपतियों को आगे आने की आवश्यकता है। इससे वहां पर मौजूद अपार संभावनाओं से क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ देश का विकास भी होगा।

निष्कर्ष (Conclusion):

यदि समय रहते पलायन की इस समस्या का समाधान नहीं ढूँढा गया तो आने वाले समय में हमें इसके नकारात्मक परिणाम भुगतने होंगे। एक ओर जहाँ हमारे शहर जनसँख्या असंतुलन का सामना करेंगे तो वहीँ गावों में वीरान खँडहर ही मिलेंगे। आज उत्तराखंड के गाँव में अधिकांश वृद्ध ही निवास करते हैं। क्योंकि अधिकांश युवा अपने रोजगार की तलाश में तथा बेहतर भविष्य के लिए गाँव छोड़कर शहरों का रुख कर रहे हैं।

इससे हमारे पहाड़ों की संस्कृति तथा वहां की पहचान को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। शहरों के विकास से देश की गति चलती है लेकिन हम नहीं भूल सकते कि हमारे गाँव हमारे शहरों को आधार प्रदान करते हैं। जब तक किसान समृद्ध नहीं होंगे, जब तक गावों को विकास की मुख्यधारा तक नहीं जोड़ा जायेगा तब तक देश के विकास की बातें सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगी। Migration from the Hill region of Uttarakhand.

 

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